सांस कियै उखड़ल उखड़ल (मैथिली कविता)
सांस कियै उखड़ल उखड़ल
आइ सांस कियै एहन तेज चलय
हम त' छी ओहिना बैसल तैसल
ई देह कियै एतेक धीपल अछि
छै घर मे सौंसे छाहरि पसरल
आगि छै पजड़ल ओहि चुलहा मे
त' हमर हृदय कोना धधकि रहल
जहि छाहरि लय गेल गाछ रोपल
कियै पात के ओ अछि झाड़ि रहल
सब दिन सिंचलहुं जीवन अनकर
अपनहि जीवन कियै जड़ल पजड़ल
सोझरहवैत रहल अनकर जिवन
अपनहिं जीवन ओझड़ल पोझड़ल
आव जे बादल के प्यास लगलै
सिन्धुक जल किय अछि नोनगर घोंकल
डॉ प्रमोद कुमार
पांडिचेरी,01-08-2020
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