रोचक प्रसंग-2 (नेता जी) हिन्दी संस्मरण

 रोचक प्रसंग-2 (नेता जी)


मित्रो, कुछ दिन पहले मैंने अपने शैक्षणिक जीवन का कुछ अनुभव (आटो वाला लड़का)आपसे शेयर किया था। आपको बहुत पसंद आया। उससे उत्साहित होकर मैं उससे आगे का अनुभव शेयर कर रहा हूं।


अव लेक्चरर के रूप में लगभग दो वर्ष बीत गये थे। मेरी पहचान एक अच्छे, मृदुभाषी, हंसमुख और विद्वान शिक्षक के रूप में बन गई थी। एच.ओ.डी भी बदल गये थे।पहले वाले का प्रमोशन प्रिंसीपल के पद पर हो गया था। जाते समय वह मेरा पीठ ठोककर आशीर्वाद दे गये थे। मुझे सच में, बहुत खुशी हुई थी और मनोवल बढ़ गया था।

दूसरे वाले एच.ओ.डी सरल स्वभाव के व्यक्ति थे लेकिन उनपर स्थानीय दवाव इतना था कि चाह कर भी खुलकर मेरी बड़ाई नहीं कर पाते थे। फिर भी कभी कभी उनके मुख से सच्चाई निकल ही जाती थी। अव मुझे फाइनल इयर में कठिन पेपर पढ़ाने को दिया गया। मैं पढ़ाने लगा। माहे (पांडिचेरी का एक जिला जो केरल के कालीकट के निकट है)एक बहुत छोटा सा जगह है और वहां की जनसंख्या (1991की जनगनना के अनुसार) मात्र 34हजार थी। अधिकांश छात्र ईंटर पास कर खाड़ी के देशों में चले जाते थे। डिग्री क्लास में छात्र मिलते ही नहीं थे। इसलिए केरल के अगल बगल के जिलों से लड़के-लड़कियों का एडमिशन होता था तब जाकर बीस सीट भर पाता था। ये छात्र अपेक्षाकृत मेधावी होते थे और साथ ही राजनीतिक रूप से काफी सजग और सक्रिय। वैसे भी केरल राजनीतिक दृष्टि से काफी संवेदनशील राज्य है। 1990के दशक में ही हरेक जिला मुख्यालय से समाचार पत्र का प्रकाशन होता था। छोटी से छोटी बात सुबह सुबह पेपर की सुर्खियां बटोर लेतीं थीं। हम क्लास वन अधिकारी थे और हमें राजनीति से अलग ही रहना होता था। केरल में , खासकर कालीकट और कन्नूर जिलों में बी जे पी का छात्र शाखा (ABVP)भी काफी सक्रिय था। कम्युनिष्ट पार्टी का (AISF) और कांग्रेस का (KSU) छात्र शाखाएं काफी मजबूत और प्रभाव वाली थीं। छोटी छोटी स्थानीय से लेकर राष्ट्रीय विषयों को लेकर हड़ताल, बंद आदि होते रहते थे। अर्थशास्त्र से और कामर्स से ही ज्यादेतर छात्र लीडर हुआ करते थे। कहीं कुछ हुआ नहीं कि सुबह सुबह वह प्रिंसीपल को नोटिस देंगे और 10बजते बजते एक लंबी घंटी बजेगी। मतलब हड़ताल। सभी छात्र घर को और हम लोगों के लिए दिन भर गॉसिप।

ऐसा हुआ कि छात्रों के तीनों अंगों का लीडर अर्थशास्त्र विभाग का ही चुना गया। क्लास लेना कठिन। अन्दर ही अन्दर डर तो रहता ही था। यदि रिजल्ट खराब हुआ तो जबाव देते रहिए और सी .आर खराब होने का डर अलग। छात्र क्लास में आते ही बात-चित करने लगते थे। हल्के से कहने पर मानते नहीं थे और डांटे तो गये। क्या करूं? टेंशन और टेंशन!

पता नहीं मेरे जीवन में अनेक कठिनाईयां बिकट से बिकट आती ही रहीं हैं और हरेक वार ईश्वर ने रास्ता दिखायाहै। मेरी क्लास पांचवीं घंटी (यानि 2.30-3.30) में थी। छात्र गप्पें लड़ा रहे थे! मुझे क्या न क्या सूझा और उसको मैंने आडवानी कहकर बुलाया। वह ए .वी .भी .पी का नेता था। सभी चौंके! फिर दूसरा लड़का जो ए.आई. एस. एफ का था, उसको नम्बूदरी पाद कहकर बुलाया। अवतो इतना जोड़ का ठहाका गूंजा कि क्या कहूं! मैं तों अवाक बस देखता रह गया। इसका प्रभाव यह हुआ कि बच्चे शांत हो गये और आराम से मेरी बात सुनते रहे।अव यह नित्य का क्रम हो गया। बच्चे बहुत खुश। मुझे देखते ही मुस्कुराते, गुड मॉर्निंग या गुड आफ्टर नून कहते। 

एक दिन ऐसा हुआ कि  मेरे क्लास में पहुंते ही कुछ लड़के खड़े हो गये। मैं ने पूछा ," क्या बात है? क्यों खड़े हैं आपलोग?" तो उसमेंसे एक लड़के ने एक अन्य लड़के की तरफ इशारा करते हुए कहा," सर आपने इसका नाम क्यों नहीं रखा? यह नाराज है।" अच्छा ऐसी बात है! तुरत ही मैंने उसका नाम 'करुणाकरण' (तत्कालिन केरल के मुख्यमंत्री) रख दिया। अव तो इतने जोर का ठहाका गूंजा कि अगल-बगल के क्लास में पढ़ा रहे शीक्षक आकर पूछने लगे कि क्या हुआ। मालूम होने पर सभी हंसते हुए चले गये। 

इसका दूरगामी परिणाम यह हुआ कि इन छात्रों ने कामर्स के अपने दोस्तों को यह बात बतला दी । अव कामर्स के छात्र जिद करने लगे कि वे लोग प्रमोद सर (यानि मैं) सेही पढ़ेंगे। उनका एक पेपर" विजनेस इकानौमिक्स " हमारा डिपार्टमेंट ही पढ़ाता था । बड़ी मुश्किल से ऐसा हुआ। एक दिन मैं पढ़ा रहा था। छात्र हंस रहे थे। अनायास मेरे मुंह से निकल गया," ह्वाइ आर यू चिरकिंग"? (चिरकुन्नू का मलयालम में मतलव होता है हंसना) मैं ने उस शब्द को अंग्रेजी मिलाकर कहा था।जब उन्हें समझ आया तो फिर हंसी का फौवारा! अव तो मैं उनका भी प्यारा होगया। कामर्स के एच. ओ.डी ने मुझे अपने डिपार्टमेंट में  बुलाकर सभी छात्रों, शिक्षकों के समक्ष स्पेशल लेक्चर दिलवाया और मुझे सम्मानित किया। क्योंकि यही कामर्स के छात्र अर्थशास्त्र के अन्य शिक्षकों के साथ अच्छा व्यवहार नहीं करते थे। यह क्रम 1999 के मार्च तक चलता रहा। उसके बाद मेरा ट्रांसफर पांडिचेरी के "कांची मामुनिवर सेंटर फॉर पी.जी.स्टडीज एण्ड रिसर्च" जोकि बहुत ही प्रतिष्ठित संस्था है, में हो गया।(क्रमश:)

डॉ प्रमोद कुमार

पांडिचेरी,6-8-2020

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