बौवा रौ बाजार जो (मैथिली कविता)
बौवा रौ बजार जो
नुनू काकिक कनकिरवा
छौंरा बड्ड होशियार
माय देलखिन टाका
वौवा जो बजार।
दस टका के तेल
दू टका के नोन
एक किलो अल्हू
दौड़ले जो रे बाबू
कलऊ मे हेतौ लेट !
संग क लेलक दोस के
उहो बड्ड चलाक
भरि रस्ता दुनु घैंसते गेल
तैयो सबटा गेलई बिसरि
कांइ कांइ किच किच खूब केलक ओ
नहिं पड़लै याद
कनि काल बिचारलक दुनू
फेर चट द घुरि गेल।
बाप छै निपट्ट, बेटा पांचवां फेल
दोस्तो भेटलै तेहने बढियां
आखर सं नहिं भेंट
हे बिधाता ई कोन खेल!
लिख देलखिन माय पुर्जी
आब जो बाऊ
जल्दिये अबिहें
बहुत भेलै आव वेर
फेर सं दुन्नू दौड़ते गेल
बाटे मे टाका गेलै हरा
आब कोन अल्हू आब कोन तेल!
माय संगें बेटो
भुक्खे रहि गेल।
प्रमोद कुमार उर्फ नेहरू लाल दास
पांडिचेरी 05-08-2019
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