श्रृद्धांजलि (मैथिली कविता)

श्रद्धांजलि 

बहुत  भेल आव हे  शांति दूत 
आव घर मे घुसि क’ मारू भूत 
कोनो ने आव कसर  रहि जाय
दुश्मन के त’ दिय नाम मेटाय। 

               कथी लै एटम वा   हाइड्रोजन ः
               कथी लै पृथ्वी ,कथी लै अग्नि
               दाइग दिय गोला,फोइर दिय बम 
               दुश्मन के क’ दिय नाको दम ।

 नहिं रहै  कोनो  नाम ओकर
करू सभटा ओरियान तकर
चौवालिस बलिदानक बदला ल
दुश्मन के नहिं रहै नाम बंचल 

               श्रद्धांजलि, श्रद्धांजलि हे अमर पूत 
               हे वीर अहां के भावांजलि अश्रुपूर्ण 
               नहिं जैत व्यर्थ अहांक प्राण कहैछी 
               प्रण लैछ आई भारत महान कहैछी!

प्रमोद कुमार उर्फ “नेहरू लाल दास “
पांडिचेरी, 15-02-19

Comments