हे मामा अहां कतय गेलहुं (मैथिली कविता)
हे मामा अहां कतय गेलहुं
ननमुन के जिज्ञासा भेलई
पूछि देलकै चान सं
हेयौ मामा दिन दिन अहां
कियै दुबर भेल जाइछी
होइत होइत अहिना एक दिन
गुम कियै भ’ जाइत छी!
हमरा सभक नहिं सोच अहां के
कतय नुका अहां जाइत छी
घोर अन्हार पसैर जाइछै
डरे हम सभ कंपै छी!
हेयौ बाबू, हे गइ बुच्ची
सुनु आइ अहां
हम्मर खिस्सा
जहिना धरा पर बच्चा बुच्ची
ओहिना व्योम मे तरेगण सभ छै
जखने हम अहां सभ लै
लवै छि माखन मिश्री
ऊ सभ रूसि क’ भगै छै
ईमहर अहां के मुंह चमकैया'
रुसि ओमहर उ कनै छै
ओकर खोराक छै चांदनी बाबू
जेना जेना हम खुअवै छी
ओकर मुंह चमक’ लगै छै
हम मलिन भेल जाइछी।
पन्द्रह दिन अहांक सेवा
फेर ओतवे दिन ओकर सभक
यैह हमर थिक जीवन लीला
नहिं रुसू हे बाबू हमर!
प्रमोद कुमार उर्फ नेहरू लाल दास
पांडिचेरी 21-05-2019
Comments
Post a Comment