चारि टा चोर (मैथिली बीहनि कथा)

चारि टा चोर

यैह दू दिन पहिलुक बात छियै। सड़क,गली सबटा सुन सान। कतहु कतहु पुलिसिया डंटाक सर सर सटाक सुना जाइ। हुरपेटा सिंह एकटा बदमास के चारि डंटा लगा अखन तक हंफियाइते छलाह कि एकटा अजगुत लीला सामने अएलनि। चारि टा मुस्तंडा हाथ में एक एक टा कूट पर “ पुलिस जी हमरा मारि दिय'” लिखल पोस्टर लेने नारा वाजी करैत सड़क पर जा रहल छल ! पहिल दू गो कहै,” पुलिस जी… पुलिस जी”
पाछू सं दोसर दुनु कहै,” गोली मारू… गोली मारू ! हुरपेटा सिंह परेशान ! एहन अजगुत !! ई त' खूंखार भोलवा गैंग छियै ! कतेक चोरी, डकैती, अपहरण में लिप्त। एकरा सब पर त' सरकार इनामो रखने छै !
तखने धराम सनी भोलवा हुरपेटा सिंहक पैर पर खसलै । हुरपेटा सिंह पुछलखिन,” की भेलौ ? शेरक ई हाल कियै ? दरोगा जी,” की पुछै छी ! करोना के सत्यानाश होइ ! एकर डरे सब हरदम घरे मे घुसल रहैया' ! हमर त' सब कमाइये बंद ! ने बाहरे आ ने भितरे ! भुक्खे मरै छलहुं ! तहिं सोचलहुं,” ओनाहिंयों मरवे करव ! त' कियैक ने अहीं हाथे मरी। अहां के ईनाम आ प्रमोशन दुनू भेटत !
आइ पहिल वेर हुरपेटा सिंहक डंडा हाथ सं ससैर गेलैन्ह!

डॉ.प्रमोद कुमार
पांडिचेरी,31-03-2020

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