चालिस का बदला (हिन्दी कविता)

चालिस का बदला

जहाज जब उड़ा
दुश्मन के सीने पर
छप्पन ईंच का गरजना
सुना तुमने!
रौंदा,ध्वस्त किया
बंचे दुश्मनों का
पैंट गीला हुआ
यह तो नमूना था
भागता है तूं कायर!
हवा में मारेंगे
समुद्र में डुवा डुवा कर
मारेंगे!
बकस रखा था
भाई समझ रखा था
सह लिया गुस्ताखियां
अव देख कायर!
पहाड़ का डोलना
तुम गीदड़ों का,चिल्लाना, भागना
अभी तो बोहनी किया है
तुम्हारी गल्तियों को
एक एक कर तौलुंगा
कसम भवानी की
एक को भी नहीं छोड़ुंगा।

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