सब तमसैल अछि (मैथिली कविता)
सब तमसैल अछि
राहरिक दालि
किन्नहुं ने सिझैया'
तहि पर सं फोरन
नित्ये जरैया'
जोरन त' दै छियै
दही नहिं जमैया'
भात होइया गील,
रोटी झड़कलही
भांटा सोआ जाय
अदौरी उंघाइत अछि
कोबी मिठ मिठ
माछ त' बिसरायल अछि
आर नहिं लगैया' नीक
तहि पर सं हुनकर कौआ
आंखि मुंह नचा क'
मुंह जाइया दुसि!
बनबै छलहुं चाह
ओंगठा गेल जरि
लिखियो नहिं पबै छी
मोन खौंझाइया'
रे मन धीरज धर
पन्द्रह दिनक बाद
घरनी अओथुन घर
जतेक मोन करतहु
करिहें सख पूर!
प्रमोद कुमार
पांडिचेरी,22-12-2019
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