घटैत हाथ बिलाइत माथ (मैथिली कविता,कोरोनाक कारण मजदूरक पलायन पर)



आठ गो हाथ
ओतवे पैर
आठे टा टिमटिमाइत आंखि
चारि टा माथ
दूगो मोटा
दुइयेटा पानिक बोतल
चिड़िया कहलकै चूं
दू सय कोसक यात्रा भेलै शुरु
डेगे डेगे रसे रसे
एक राइत बितलै
फेर पैर उठलै….
आइ सातम पड़ाव अएलै
एकटा बोतल कम
आंखि सं पानि टपकलै
पसेना छियै कि नोर
के जनै छै!
फेर पैर चललै
दोसरो बोतल गेलै!
आव पाइन की आ पियास की?
फेर पैर चललै
एकटा मोटा खसलै!
दोसर मोटाक आंखि पाथर
दस कोस बांकी
टांग थरथरा गेलै
आंखि उलटि गेलै
गाछ पर बैसल गिद्धक
पांखि फरफरा गेलई !

डॉ प्रमोद कुमार
पांडिचेरी,29-04-2020

Comments