बच्चू बाबू की करताह (मैथिली बीहनि कथा)

बच्चू बाबू की करताह
                    (मैथिली बीहनि कथा)

आने दिन जेकां आइयो बच्चू बाबू भिनसरे भिनसर टहलै लय निकललाह। मध्यम शरीर मुदा हृष्ठ पुष्ट। एगो नामी मल्टिनेशनल कंपनी मे जेनरल मनेजर छथि। भगवान सब किछु देने छथिन। सबसं बेसी जे दयालु आ मिलनसार व्यक्तित्व के व्यक्ति छथि।शहर मे गामक बहुत लोक रहै छै आ हिनका ओत' हाजरी दैत रहैत छनि। कनिञां खबखबायल रहै छथिन मुदा हिनका मोन लगै छनि।
आइ टहैलतो छथि आ सोचितो छथि। “ ई फेकना बड़ चालू अछि! झूठ-फूस कहि क' पांच सै-हजार टाका लय लैया' आ लौटबै के नाम नहिं! सब बेर नव नव मुसीबत। पिछला बेर गिट्ठह बान्हि लेने रही जे आव किछो बहाना बनौत, हम पाइ नहिं देबै! मुदा तेहेन ने भेना पसारलक जे हमरा की कही, ननकू माइयो के मोन पसिज गेलैन्ह। दू हजार लइये क' छोड़लक ! कहलक जे मायक वर्षी छै! बाद मे पता लागल जे ओ त'  अखन जिविते छथिन! ठहरै आब तों फेकुआ ! तेना क' गरदनि मड़ोरबौ ने जे नानी याद आवि जेथुन!”
बच्चू बाबू ई सोचिते छलाह कि क्यो धब सनी पैर पर खसलनि। ईहो कोनाहिंयों क' अपना के सम्हारलाह! किछु कहितथिन कि ओहि सं पहिने फेकुआ अपन भेना पसारलक। दुनु पायर के गछारने जोर जोर सं राग अलाप' लगलै । मालिक यौ मालिक ! अहि बेर बंचा लिय' ! बच्चा बड्ड जोर बिमार अछि! अही ठाम लोटस हासपीटल मे भरती अछि! डॉ. तत्काल पचास हजार जमा करब' कहलक अछि!  मालिक हमर बेटाक जान बंचा दिय मालिक!
बच्चू बाबू की करितथि! चट्टे घुमि गेलाह आ कनिञां सं आंखि बंचा क'  पन्द्रह हजार दय देलखिन!

डॉ.प्रमोद कुमार
पांडिचेरी,17-01-2020

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