छप्पन ईंची (हिन्दी कविता)
छप्पन ईंची
छप्पन ईंच का सीना ताने
चल रहा है शेर
पीछे पीछे शाह चल रहा
कैसा है यह मेल !
सत्तर वर्ष से चुभा रहा था
रोज ही हमको शूल
चमचों की तो आफत आयी
देश द्रोहियों का
खतम हुआ सब खेल।
पूरा देश अव अपना आंगन
जहां चाहो तुम रहलो
दुश्मन की तो कील ठुकी है
आओ जश्न मनालो।
प्रमोद कुमार
पांडिचेरी05-08-2019
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