कन्या पूजन (मैथिली कविता)

कन्या पूजन 

धूप दीप नैवेद्य चढ़ा कय 
मेवा मिश्री खुआ खुआ क’ 
पैर जिनकर पूजै छी आई 
भ्रूणहिं मे अहां पता लगा क’ 
कंठ कियै दबवै छी भाई! 
जँ पूजा चाहै छी करय 
कन्या के संताने बुझी 
सब संतान समान होइत अछि 
ई बूझि निक शिक्षा दियावी 
शिक्षित कन्या सबल हेती 
बनि सरस्वती, लक्ष्मी बनि जेती 
स्वत: दुर्गा कालिक रूप लेती 
सबल कन्या,  सबल माता 
नैहर, सासुरक मान बढ़ौती 
प्रथम गुरु भय संतान अपन कें 
सरल, सुन्दर संस्कार देती 
तैं लिय’ संकल्प, आगू बढ़ू 
अक्षर के हम दीप बनावी 
फूल के मोसिदानी 
कलम के बना कय मेवा मिश्री 
हुनकर हाथ मे थमा क 'ई सब 
आई कन्याक पूजन नमन् करी! 

प्रमोद कुमार उर्फ नेहरू लाल दास
पांडिचेरी 06-10-2019

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