बाल गोपाल (हिन्दी कविता)

बाल गोपाल 

हे  नन्द लाला बाल गोपाला आजा मेरी बगियन  में 
मैं बन जाऊं माखन तेरा लिपट जाऊं तेरे आनन में 
या बनकर  मिसरी  की डलिया तेरे मुख घुल जाउं 
जनम जनम  की साध  हो  पूरी  तेरे में  मिल  जाऊं

      या बन जाऊं घट  माखन का तेरे कर फुट जाऊं मैं 
      खेलें तेरी  अंगुली जिसपर  बंसी वही  बन जाऊं मैं 
      अपनी बंसी का धुन बनाकर मन में ही रख लेना तूं
      या  मुझे बनाकर डोरी कदम्ब पे झूला डाल लेना तूं

मैं  बन  जाऊं कदम्ब  की डाली  धुन मुरली  की  छेड़े तू
तुम्हें    देख   नाचेंगी   गोपियां   मेरे   मन   में   नाचे   तूं 
या   बना  ले   गैया   अपनी   घूमूं   रन   वन   तेरे   संग 
या बन जाऊँ पथ वृन्दावन की जिसपर हरदम चलना तूं

       हाथी  घोड़ा  बन  कर  तेरी  रथ में मैं जुत   जाऊंगा 
       तूं   इस  रथ  पर  बैठ   कन्हैया   प्रेम  रस  फैलायेगा 
       हे नन्द लाला  मदन  गोपाला बस जा मेरी नयनन में 
       जिधर  मैं  देखं  तूं  ही  तूं  हो  नाचत  मेरे   आंगन में

प्रमोद कुमार उर्फ नेहरू लाल दास
 पांडिचेरी ,03-07-2019

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