धीपल तव ( मैथिली बीहनि कथा)

बीहनि कथा
                                                                          धीपल तव
मुन्नी काकिक नजरि सडक पर परलन्हिं। डाकपिन  आवि रहल छल। मुन्नीकाकिक हर्षक सीमा नहिं। अति उत्साहित भ’ बजलिह,”कहै छलहुं! बौवा के लिखियौ! देखलियै आव! अपन खून अपने होइ छै। डाक पिन अबैया’। जरूर मनिआर्डर अनने हैत।“मुन्नी कका कनि आश्वस्त भ’ सोच’ लगलाह। 
व्यर्थे संकोच करै छलहुं। आई पढेनाइ लिखेनाई काज देलक। बेकारे  संदेह क’क मोन खराब कैने छलहुं। 
मुन्नी बाबू सोच लगलाह। एखने पुत्र सं मोन खट्टा कैने छलाह आ’ आव गर्व होइ छैन! 
।पी. एच. डी. कैने अछि हमर बेटा! बरका यूनिवर्सिटी मे प्रोफेसर अछि। बाप रे! ओकर ठाठ-बाट! नाम-प्रतिष्ठा देख-देख करेजा जुड़ा गेल रहै पौरकां! किताबो लिखने अछि।
एम्हर किछु मास सं दुर्दिन चैल रहल छलैन्ह। बड कष्ट! फाटल धोती। एक दिश झंपथि त’ दोसर दिश उघार! पत्निक जोर देला पर बेटा के चिट्ठी लिखलखिन्ह। 
अहां जे हजार टका महीना पठबै छी, उ ‘धीपल तव पर पाइनक बूंद जकां छन्न द’ बिला जाइयै। 
बहुत कर्ज-बर्ज भ’गेलै! बाउ! हम जनै छी! अहूं कोनो घी मे नहिं हेलैत हैब! तथापि हे बाउ! एक मुस्त किछ…यैह करीब पांचेक हजार टाका.... भेज दिय। तदोपरान्त महिने महिने जे एक हजार भेजै छी..... तेकरा दू हजार... महिना क’ दियौ। 
अहांक बुढ माय-बाप जिवन काटि लेताह। 
पति के चुप देख मुन्नी काकी टोकलखिन्ह, “की भेल अहां के! डाकपिन कखैन सं ठाढ अछि !”
मुन्नी बाबू जेना निन्न सं जगलाह! 
हां...! आं....!! हमरा कहलहुं? ओहिना कनि आंइख भरि गेल। गमछा सं आंखि पोछैत बजलाह। 
मनिआर्डर आयलै। लिय’ दस्खत करियौ। 
कतेक छै? दू हजार...! 
नि:सांस छोडैत ल लेलैथ! लक्षमिक अपमान केना करता! 
निचा लिखलाहा पढलैथ, “बाबूजी! प्रणाम! मां के चरण स्पर्श! विशेष की लिखु। अहां सभक आशीर्वाद सं सभ कुशल अछि। एतवे कहब जे ‘तव' के बेसी नहिं धिपाऊ! पाइन छन्न द’ नहिं उड़त “!
प्रमोद कुमार, उर्फ “नेहरू लाल दास “
पॉंडिचेरी , दी. 25-01-2019

आदरणीय एडमिन 
हम अपन “बीहनि कथा “,(धीपल तव) बीहनि कथा प्रतियोगिताक लेल पोस्ट क’ रहल छी। 
कृपया एकरा प्रतियोगिता मे शामिल क’ हमरा कृतज्ञ करी। 
धन्यवाद ज्ञापनक संग 
अपनेक
प्रमोद कुमार उर्फ “नेहरू लाल दास “

Comments