घिस घिस मिटती जिंदगी
घिस घिस मिटती जिंदगी
हां हां मेरे पैर पर पैर दो
अव घुटने पर दो
कमर पर रखो
इसी तरह रखते जाओ
बढ़ते जाओ
एक एक कर
छाती पर
हां अव कंधे पर
अव सफलता का
छलांग लगाओ
पहुंच गये न
मंजिल तक !
कहा था न
पहुंचा दुंगा
बहुतों को पहुंचाया है
अव घिस गया हूं
मंजिल तक पहुंचाते पहुंचाते
देखो वह खड़ा है
दूसरा पत्थर लेकर
नया लगायेगा
घिसी सीढ़ियों का क्या काम
डॉ प्रमोद कुमार
पांडिचेरी,28-6-2020
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