रसगुल्ला का लौथ (मैथिली बीहनि कथा)

रसगुल्ला खा लौथ 
                                  (मैथिली बीहनि कथा) 

मैंयाक उमर भय गेल छन्हि। अपना बुते अपन निमेरा नहिं होइत छन्हि। उ त’ धन्य कही पोती के जे सब निमेरा करैत छैन्ह। आइ ओकरे विवाह छियै। बड्ड सुन्दर इन्तजाम।  बरियाती लय रसगुल्ला,  गुलजामुन  बनल तैयार छै। वीडियोग्राफर फोटो लय रहल छै।बाजा बाजि रहल छै।  मैंयांक बड़की पुतोहु पांच सै किलोमीटर दूर एगो टाउन मे रहै छथिन। वियाह मे आयल छथिन। सासुक सेवा के के कहय,  लगो मे जैवा मे घिन लगै छन्हि। तैं हंटले रहै छथिन। एहने अवसर पर अबै छथिन। 
एखने मैंयां के नहा सोना क’  असोरा पर कुर्सी पर बैसायल गेलन्हि।  पोतीक आग्रह रहै। पोती अपन दादी लग आवि ठाढ़ भेल। विडियो बला के कहलकै, “हेयौ  हमरा दादी संग फोटो खिंच दिय’! पता नहिं फेर दादी सं भेंट होयत किनहिं! भावुक भय आंखि पोछय लागल। विडियो वला फोटो लेमय लागल। 
“ हे हंटै जाइ जो। हमरा फोटो खिंचब’ दे । बड़की पुतोहु एक छिपली मे रसगुल्ला आ गुलाबजामुन ल’ कय सासुक बगल मे सबके ठेल ठालि क’ ठाढ़ भय गेली। विडियो बला के कहलखिन, “हे देखू नीक फोटो खींचब! विडियो के एक कॉपी  हमरा अवश्य देव। ई कहि सासु के मूंह मे रसगुल्ला  सटा देलखिन। दादी पोती दिश आ पोती भगवती घर दिश ताकय लगली! 

प्रमोद कुमार उर्फ नेहरू लाल दास 
पांडिचेरी 06-10-2019

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