एक जोर धोती (मैथिली बीहनि कथा)
एक जोर धोती
(मैथिली बीहनि कथा)
हेयौ रामफल! अहां हमर एतेक सेवा कियै करै छी! जनै नहिं छियै, “ हम त’ निरसल लोक छी। जेना तेना क’ पढ़लहुं, नौकरियो भेल त’ बित्त रहित कॉलेज मे। हमर सेवा कयला सं अहां के की भेटत! “
“नहिं हाकिम! अहां एना कियै कहै छियै! अहां त’ प्रोफेसरो स उपर पिरिंसिपल छियै। एक्के बेर तते भेटत जे... “ रामफल बजलाह।
हंह! जनै छियै अहां हमर मोन रखै लय बजै छी! ओहन दिन भगवान कहां लिखने छथिन हमरा भाग्य मे। रामफल कतेक नीक छी अहां। बूढ़ भेलहुं! तैयो सभक सेवा करै छियै। हमरा अहां स’ सेवा टहल करवैत कोनादन लगैया ‘!किछु देवो करितहु त’ मोन मजगूत रहैत। मुदा से त’ सपने रहि जैत!
हाकिम…! एना कियै बजै छियै। अपन कपार के देखियौ! कत्तेक चमकैया ‘!हम मुर्ख छी मुदा अहांक कपार पर लिखल पढ़ि लेलियै। एक दिन अहां रुपैयाक ढ़ेर पर बैसब! हम कहै छी! सत्तरि वर्षक रामफल जे अपने पेट पोसै लय एकटा गृहस्थक ओतय रहि सेवा टहल करै छलाह, बजलाह। “अच्छा त’ बाजू, “हमरा जे नीक नौकरी भेटत त’ अहां की लेव? “जिद कयला पर बजलाह, “ हाकिम हमरा एक्के संगे एक जोर धोती कीन देब। एक संगे जोर भरि धोती कहिया भेटल से याद नहिं।
समय बितलै। पवन जी के प्रोफेसरक नौकरी भेटलैन्ह। लगभग पांच बर्षक बाद एक दिन दू जोर धोती, गंजी, कुर्ता लय विदा भेलाह । सोचलैथ जे अचोके मे देबनि त’ आर खुश हेता रामफल। पहुंच गेलाह। देखै छथि जे एत’ त’ रामफलक अंतिम यात्राक तैयारी भय रहल छलै। पवन जी जोर भरि धोती हाथ मे लेने काठ बनि गेलाह।!
प्रमोद कुमार पांडिचेरी
31-10-2019
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