राधा- मोहन संवाद (गीत) हिन्दी
तु राधा घनश्याम मैं तेरा
तु नाचो मैं मुरली बजाऊं
मैं माखन तु है मिश्री मेरी
तूं नदिया मैं धारा तेरा
तूं राधा घनश्याम मैं तेरा ….!
जमुना तट पर झूला टांगूं
तूं झूलो मैं डोरी खींचूं
हौले – हौले पेंग बढ़ेगी
धरा गगन मिल जायेंगी रे
तूं राधा घनश्याम मैं तेरा……..!
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मैं मूरख कुछ भी न जानूं
तूं माधव जगत के स्वामी
बन मयूर नाचो मेरे मन में
हर क्षण नयन निहारे तुझको
मैं राधा घनश्याम तूं मेरे………..!
मन की डोर बंधी है तुमसे
मैं जाऊं वहीं तुम जहां जाओ
जग चाहे कुछ भी कर ले रे
रंगी श्याम रंग न धुल पाये
मैं राधा घनश्याम तूं मेरे ………!
डॉ प्रमोद कुमार
पांडिचेरी,8-5-2020
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