देव दूतक रूप मनोहर (मैथिली कविता)
देवक दूत रूप मनोहर
अलक मनोहर पलक मनोहर
कुसुमित गात लाल मनोहर
भाल भास्कर सन रश्मि मनोहर
स्निग्ध उषा सन रूप मनोहर।
चपल चंचल नयन कमल दल
प्रहरी पलक द्वय स्थिर चंचल
धप धप धाप पाद स्वर लहड़ी
जेना राग रागिनी पसरल।
शोभा एहन जे शब्द ने बान्है
आभा एहन कोना कवि गाबय
भाषा एहन जे माय' टा बुझय
तिरपित पिताक भाव मनोहर।
ई मन मोर शतायु होथि नाचथि
सूर्य समान चमकथि ओ दमकथि
हिम राज सन भाल हो उंचगर
कर्म हो सुन्दर यश मर्म मनोहर ।
डॉ. प्रमोद कुमार
पांडिचेरी,20-01-20
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