माछक याद (मैथिली कविता)

माछक याद 

एक त बीमार 
तै पर सं मारि 
कोन अपराध कैल जे 
मोन देलहुं पारि! 
भोरे सं मोन मे
मुंगरी अछि बैसल 
मोंछ पर ताव द’ सिंघी नचैया, 
‘टेंगरा पोठी गोल गोल घुमैया 
रौह बुआरी तमाशा देखैया 
झिंगा बैसल 
कनखी मारैया 
कबई कोतरी
भाग मनवैया 
सूहा सुसुऔने अछि 
मारा अछि मारने 
डेढ़वा के मोने मोन लड्डू फुटै छै 
गड़ै गरचुन्नी 
मखौल उरेने अछि। 
सूहा रेवाक त बाते ने पुछू 
जेना दौड़ा दौड़ा क’ 
खिहारने फिरै या 
जेना फुटल कपार पर 
बिधाता नचैत होथि 
तेहने नाच आई 
भुन्ना नचैया’ 
दरही बेचारी बड़ तन्नुक 
तेहने ओकर चेचरा दोस 
बैसले बैसले मुस्की छोड़ैया 
नैनी भाकुर भौकरा बिलाड़ 
हमर भाग पर खूबे हंसैया ‘
आवि गेलै जितिया 
ऐंठ रहल पोठिया 
ओकरो भाव आइ 
बड्ड बढ़ल छै 
जारक मास मे 
लपची अदीव 
बामी त डेरौन 
बिसांढ़ी बेजोर 
जारक मास मे गैंची बड नीक 
कांट चाहे जत्ते 
भुनचट्टियो बड़ स्वादिष्ट 
बाइढ़ मे छही छलै बौवाइत 
बाघी माछ संग 
कबड्डी खेलाइत 
खेलाइ जाइजो तों सब 
जत्ते खेलेबैं 
दुइस ले मुँह तूं 
जत्ते दुसबैं 
अएबौ एकदिन 
अनबौ पकरि 
तैर क’ भुइज क’ 
आकि झोड़ैल 
खा’ क’ मारबौ 
बड़का ढ़कार!! 

प्रमोद कुमार उर्फ नेहरू लाल दास 
पांडिचेरी 21-09-2019

Comments