राधा श्याम मिलन ( हिन्दी कविता)
राधा श्याम मिलन
किसने छेड़ा धुन मुरली के दूर सघन कानन में
कानों में मिश्री है घुलता दिल के तार बजे हैं
श्याम वरण कमल नयन आरक्त कुंतल घुंघराले
चितवन धार मारक है इतना तरुणी चित डोले
व्याकुल तरुणी है एक राधा सुध बुध भूल चुकी है
दौड़ी वेग से वाला देखूं किसने मुरली धुन छोड़ी है
अच्छा तु ग्वाले का बालक मैं भी ग्वालिन ब्रिज वाली
तू चराता गैया अपनी मैं उपले चुन कर लाती
जोड़ी अच्छी जमेगी अपनी दोनों ही ब्रिज वासी
मिलन हुआ ऐसा उनका कि कहीं नहीं उपमा ऐसी
प्रमोद कुमार उर्फ नेहरू लाल दास
पांडिचेरी 26-09-2019
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