पाइन पियेबै (मैथिली बीहनि कथा)

पाइन पियेबै
                                      (मैथिली बीहनि कथा) 

हे! सुनि लिय'
की? कहियौ ने! 
हम चारि दिन लय अन्तह जारहल छी। अहां सभ के पाइन पियेबै। खाइ विना दू चारि दिन टिकियो जेतै मुदा पाइन विनु चौबीसे घंटा मे टन्न गोसांईं। 
ई त’  अहां सभ बेर कहि जाइ छी। कोनो नव बात होइ त' कहू।
देखियौ ई सभ जे छथि से बड्ड संतोषी! बड्ड उपकार मान’ वला। दाना पाइन दैत रहियौन्ह त’ खूब खिलखिलाइत रहता। दिन दूना आ राति चौगूना बढ़ता। रंगो खूब चमकौता । मोन के मुग्ध कयने रहै छथि। 
हँ! से त’ सच्चे !
आ एकटा जे छथि, जिनका हम सबसं बेसी दुलाड़ करै छियन्हि , हुनकर हाल नहिं पूछू। हुनका सम्मान दय घरे मे रखने छियन्हि। नित्य दाना पाइन दै छियैन्ह।  तैयो मुँह फुलौने रहै छथि। बड्ड प्रयत्न सं कहियो कनि खुशी हुनकर मुँह पर चमैक जाइ छन्हि। आ यदि खाना पाइन मे जे दिक्कत भेलनि त’ तुरत तेना ने मुँह खसा लेता जेना कहियो किछ भेटवे नहिं करै छनि। तेकर परिणाम त’ देखते छियै। हमर फटलाहा कोट! 
हँ! से त’ जनै छियै। 
तैं कहलहुं अहां के। 
अच्छा त’ अहां लैंडिंग पर राखल गमला महक “मनी प्लांट” के वारे मे कहै छलहुं! 
हँ यै!!!!

प्रमोद कुमार उर्फ नेहरू लाल दास पांडिचेरी

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