युद्ध आ परिणाम (मैथिली कविता)
युद्ध आ परिणाम
भांजू तलवार युद्ध भूमि जा
आकि शांतिक माला जापू
नहिं फुरा रहल अछि आई
आगू बढ़ि कनि दिय’ बताय।
युद्ध त हम अनेकों लड़लहुं
रावण मारलहुं, राक्षस ढ़ेर
कड़ोरों मारि कौरव के जितलहुं
शांति त’ नहिं सपनों मे भेल
बिलखैत वालक, कलपैत माय
अनेकों मांगक सिन्दुर पोछैत
बृद्धक आस आ गामक गौरव
सबतरि एहने कुदृश्य देखैत
केहन द्वन्दव मे फंसलहुं आइ
युद्ध करैत ने शांतिये भेटल
शांति शांति क’ युद्धे टपकल
अहि बिपत्ति के कोन उपाय।
कोन दुश्मन के कत्त मारू
घर मे दुश्मन, बाहरो दुश्मन
सांप छुछुनैर के पैर भेल अछि
अहीं बताउ की कहै छी।
प्रमोद कुमार उर्फ “नेहरू लाल दास “
पांडिचेरी, 19-02-2019
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