दीप (मैथिली कविता)
दीप
कनिञें कनिञें दीप बनेबै
छोटकी छोटकी बाती
सबहक घर मे बंटबै जा कय
सुन्दर दिया बाती !
टिम टिम टिम टिम ज्योति जे फैलतै
पनघतै आश हृदय मे
तिमिर डेरौन आब नहिं लगतै
घर घर लक्ष्मी बसतै !
आउ यै बहिना आउ यौ भैया
गर बहिंयां दय चलबै
ऊँच नीच या गरिब धनिक के
लेस ने कोनो रखबै !
संग संग खैबै संग संग गेबै
नाव के खेब ल’ जेबै
घर घर दीप जरा क’ बन्धु
अपन द्वार सजेबै।
प्रमोद कुमार पांडिचेरी
24-10-2019
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