जुत्ता छत्ता डोपटा (मैथिली बीहनि कथा)

जुत्ता छत्ता डोपटा
( मैथिली बीहनि कथा)

उमा बाबुक बेटिक विवाह रहनि। गरीब मुदा उत्साह कम नहिं। शहरक सबसं पैघ कपड़ाक दोकान पर बैसि, पुर्जी देखि देखि धोती, साड़ी, कनिञां लय पुतली, वर लय पैंट, शर्टक कपड़ा आदि सब किनलाह। सेठ जी के पाई दय ट्रेन पकड़ि गाम पहुंचलाह। देखै छथि जे सेठ गल्ती सं हिनका पांच हजार टाका बेसी दय देलकैन अछि। घर मे सब बड़ खुश। आह ! खगताक बेर मे भगवान सहायता कैलन्हि,” पर्री वाली कहलखिन “। हं गै माय,” बाबू हमरा लय पैंटक  कपड़ा नहिं किनने छलाह। आव कीन देबै ने बाबू”! लोटन एते बजले छलै कि नन्हीं जोर सं बाजि उठलै,” नहिं नहिं बाबू हमरा लय निकहा सलवार समीज…।“
चुप रहै जाइ जो,” भगवान देलखिन अछि त आब सबटा भ' जेतै। झगड़ा नहिं कर! पर्री वाली कहलखिन । 
एमहर भोरे भोरे उमा बाबू ट्रेन पकरि शहर पहुंचि गेला। शेठ जी के पाई वापस कय देलखिन । सेठ जी अचंभित ! एहन लोक नहिं देखल! किछु टाका ईनाम मे देबय लगलखिन मुदा उमा बाबू नहिं लेलखिन। तखन सेठ जी हुनका छत्ता,जुत्ता आ डोपटा दय सम्मानित कैलखिन। दुपहरिया मे रिक्शा पर चढ़ि उमा बाबू गाम अएलाह ! प्रसन्नता सं चेहरा दप दप ! बेटा,बेटी,पत्नी दौड़ले एलखिन, कतय चलि गेलियै?”
“ सेठ जी के पाई वापस कय देलियैन्ह। देखियौ हमरा छत्ता, जुत्ता आ डोपटा दय सम्मानित कैलैन्ह !” उमा बाबू एतवा बजले छलाह कि बेटा हाथ सं सबटा झपटि खरिहान मे फेक देलकै। उमा बाबू तकिते रहि गेलाह !

डॉ प्रमोद कुमार
पांडिचेरी,19-03-2020

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