कोन अपराध सजा मोर भेटल (मैथिली कविता)

कोन अपराध सजा मोर भेटल 

कोन   अपराध   सजा  मोर  भेटल 
अहिंक    श्रृजन   हम   गौलहुं   यौ 
दय चन्द्र प्रभा मुख अहां सजाओल 
हम    गौलहुं     दुख   पओलहुं  यौ 

        कमल  नयन  द्विय काजर  सं घेरल 
        कारी  कुंतल  बड़  उमड़ल  घुमरल 
        कपोल  बिच  खाधि अहीं बनाओल 
        गुण गावि किय हम चटकन खायल 

कटि   पातर  करी   लोच  बनौलहुं 
हंसाक  चालि  सं  सज्जित  कैलहुं 
दय  उन्नत  पयोधर  अधर  गुलाबी 
कोकिलक स्वर  दय कंठ सजौलहुं

        पथ सुवासित पद धरथि जतय ओ
        मद  मत्त समीरण नृत्य करैत अछि 
        हृदय  चन्द्र  केर   ज्वाला  भभकैन
        पुष्पित   कुसुम   मूरी  गोंतैत  अछि 

धरि  भ्रमर  रूप ई करिया  बदरा
नाचि  चहुँदिश  गीत  गवैत अछि 
करै  मधुपान   मानो  ओ   पाबय 
हम गावि गावि अपमान सहै  छी। 

          कोन अपराध हम सजा पवैत छी !

प्रमोद कुमार उर्फ नेहरू लाल दास 
पांडिचेरी 27-08-2019

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