ऐ हवा कुछ बोल न (हिन्दी गीत)
ऐ हवा तुम कुछ बोल न
हौले हौले ही डोल न
देख पत्ते निर्जीव टंगे हैं
जीवन उनमें फिर घोल न !
ऐ हवा कुछ बोल न …!
पेड़ पर बैठे खग के बच्चे
सड़क किनारे छोटे पिल्ले
गली में घूमते वन के जीव
पूछ रहे मानव कहां गोल !
ऐ हवा कुछ बोल न …!
बादल की बूंदें पूछ रही हैं
बच्चे क्यों नहीं कूद रहे हैं
बड़े बूढ़ों की डांट बन्द है
छाते सब क्यों हो गये गोल !
ऐ हवा कुछ बोल न …!
मेरी तो उतनी पहुंच नहीं है
तूं तो जाती अम्बर के आगे
जा विधाता से कह के आ
बंद दरवाजे फिर खोल ना !
ऐ हवा कुछ बोल न …!
डॉ प्रमोद कुमार
पांडिचेरी,11-5-2020
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