धड़कै हृदय बड़ भारी (मैथिली कविता)
धड़कै हृदय बड़ भारी
गोर बदन पर कारी साड़ी
जनु चान के घेरने बदरी
झंपने पयोधर बड़ जतन स’
तैयो तकै छै हुलकी मारि
गोर बदन........... ।
कुंतल तीतल बून चुबै छै
मोतिक लड़ी चमैक रहल छै
अपनहिं रस सं मातल छै ओ
नजरि फेरि नहिं देखै किम्हरो
गोर बदन........ ।
कुंतल के ओ झटकि देलकै
मोतिक माला टूटि क खसलै
गहिंर भ गेलै गातक खाधि
डव डव करैत ठोढ़क लाली
गोर बदन.............. ।
ऐना लग मे ठाढ़ भेलि ओ
देख क’ अपने लाल भेलि ओ
एक नजरि ओम्हरे छै लटकल
ब्याध भ’ गेलइ अपने घायल
गोर बदन............ ।
प्रमोद कुमार पांडिचेरी 20-10-2019
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