वन फूल (मैथिली कविता)

वन फूल 

कतय छिपल वन फूल जकां 
           आभा  छिटकाय  रहल  छी 
मोती पसारि अपन भाल पर 
           सुगंध    पसारि   रहल   छी 

 हरित पात  चहुं  ओर  प्रिय 
          रूप  अहिंक  निरखैत  अछी 
 के  गढ़लक   एहन  फूल के
          मनहिं मन सोचि रहल  अछि 

चकित  भ्रमर  रन वण  घूमै 
           के सुगंध पसारि  रहल  अछि 
अहां मुग्ध अपनहिं  मे अपने 
           हृद  अनेक  भेदा  रहल अछि

हृद   वासिनी  जीवन   प्रिया 
          वन तजि  नयन मे वास  करी 
दिवश रात्रि निरखि निरखि हम
          निज  जीवन  मे उल्लास  भरी 

प्रमोद कुमार , पांडिचेरी 07-12-2019

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