चल रे चिड़ैया चल ने (मैथिली कविता)
चल रे चिड़ैया चल ने अप्पन देश फेर सं
अपने पांइखे उड़ि लेबै आ दाना चुगबै खेत सं
खत्ते खधिये पाइन पियब आ गाछ बृक्ष तर सूतब रे
घाम पसेना बहतै बहौक उड़ैत पांइख नहिं रोकवै रे !
जोतला खेत मे बैसब जा क' बुन्नी के बजेवै रे
झखरल पीपर डारि पर जा क' खोंता फेर सं बुनवै रे !
अनके खोंता बुनलौं सबदिन अप्पन हार के तोरि क'
आइ जे बिपदा आयल अछि त' हांकि देलक सब जोर सं !
अ आ इ ई पढ़बै बाबू नहिं पढ़ी हम ए बी सी
खुद्दी मेरखी खा क' जी लेब पुआ पोलाव के छोरि क' !
गाम गाम के पीपर पाकैर बैसवै जा क' उड़ि उड़ि रे
कौआ मेना सं गप्प लड़ेबै मिल क' भिरबै चिल्होरि सं !
डॉ प्रमोद कुमार
पांडिचेरी,30-05-2020
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