हे बसंत अहां आउ ने (मैथिली गीत)
हे बसंत अहां आउ ने
(गीत)
हे प्रिय बसंत अहां आउ ने
जहि रस भरल अहां छी उब डुब
जड़ चेतन पावै अछि जीवन
वैह हमरो मे भरि जाउ ने
हे बसंत अहां आउ ने!
आतुर छी हम जाड़ स राजन
झड़ैत पात आ अपन कपार स
राति पहाड़ बनै अछि हम्मर
भोर सांझ कुहेसक प्रहार स
हे बसंत अहां आउ ने!
पियर धानी परिधान पहिरा क'
अमलतास कचनार ओछा क'
कोकिल आमक गाछ बैसा क'
अहां पंचम सुर सुनबाउ ने
हे बसंत अहां आउ ने!
कोकिल गाछ पात सं लादल
वन उपवन कुसुम सं पाटल
कुंज कुंज मे भ्रमरक गुंजन
सतरंगी सांझ बिछाऊ ने
हे बसंत अहां आउ ने!
डॉ प्रमोद कुमार
पांडिचेरी,23-01-2020
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