हुनके राग हुनके गीत (मैथिली कविता)

हुनके राग हुनके गीत

हे यौ ! कोन रसक रचना छल ई
आ कोन रागक गीत
सोलह जने चित्कारि उठलै
आर कतेको उठलै चीख
की यैह छल अहांक संगीत?
ई अहांक ऋंगार छल
आ कि प्रेम रसक कविता
विरह छल कि करूण
वात्सल्य ! हुंह ! के मानत
ओ त' माता पिता में होइछ
अहां दुनु मे सं की छी
किछु नहिं ! क्यो नहिं
तहिं ने बीभत्स्यक रचना रचलहुं
लाखों के त' लिलिये रहल छी
आव अहांक एक इहो रूप !
चारि टा रोटी 
रेलक पटरी बिच छिड़ियैल
देखैल अहां के !
आंखि धंसि गेल रहै ओकर
पेट पांजर सट्टल
बेमाय फाटल
हुक हुक करै छलै
भविष्य संग चलै छलै
अपन पेट जरा
ओकरे जलखै लेल राखि देने रहै
एतबे भुक्खल छलहुं
त' वैह खा लितहुं
नहिं अहां त' ओकरे खा लेलियै
अहां के की कहू आब?
रक्षक की भक्षक ???

डॉ प्रमोद कुमार
पांडिचेरी, 10-5-2020

Comments