कचराक डिब्बा (मैथिली कविता)

कचराक डिब्बा 

यमराजक आगमनक सूचना भेट’लय 
अप्रत्यक्ष मुदा सोलहो आना सही 
हलदिली पइस गेलै
आत्म समीक्षाक समय अछि 
एहन कोनो काज त’ कयलहुं नहिं 
भेटत त’ नर्के! 
खौलैत तेल मे डुबायत 
आड़ी ल’ क’ काटत 
या नहिं त’ सूली पर टांगि देत 
ऊ ढ़ेपा सन सन लाल लाल आंखि वला 
यमदूत सभ! 
जीवन त’ ब्यर्थ गेल 
जिवतहुं आ मरलोपरांत! 
पता नहिं कोना आई सब ज्ञान
सक्रिय भ’ गेल। 
कियैक ने मरितो मरितो 
किछु नीक क’ जाई! 
नर्को मे जा त’ दु:खे भोगब्
जाबत धरि दोसर योनिक निर्धारण होयत
यमराज पर त’भारे रहबनि 
खेनाई खोराक त’ देवैये परतनि 
चाहे जे खुआबथि 
मल, मवाद, मज्जा आकि किछु और! 
अनायास मोन मे एकटा आइडिया आयल
कियैक ने कचराक डिब्बा बनि जाई! 
जतेक तरहक मैल कुचैल 
पाप, अधर्म,  अत्याचार, 
संक्षेप मे पापक सभ आचार 
लोक हमरा मे फेकत 
वा चुम्बक लगा हम खीच लेब
हम चाहे जतेक घिनाइ 
दुनिया त’ स्वक्ष भ्’ जायत 
ई बिचार अविते मोन प्रफुल्लित छल
एतवा मे यमदूत सभ आयल 
भगा देलियै ओकरा सब कें
बड मजगूती अनुभव क’ रहल छी 
हारि क’ यमराज ऐलाह! 
आउ! आउ! स्वागत अछि! 
उहो अचंभिते छथि 
एहन पागल नहिं देखल! 
बाज!  की मंगै छैं! 
औरदा छोरि जे मंगबैं सभ देबौ! 
बड्ड नेहौरा कयलियन्हि 
आखिर हमरा एकटा बड़का 
कचराक डिब्बा बना ओ चलि गेलाह! 
अदृष्य, अपार चुम्बकत्व के गुण द’ गेलाह। 
आव हम बड्ड खुश छी 
लोक लेल मरल छी 
मुदा हमहीं जिबैत छी, 
आर सब त मरले 
अखने एगो  महिला 
ताड़िक भरल घैल हमरा मे उझैल गेलै
ऊंह महक! 
मोन के बुझौलियै 
चुप चुप,  पाप कटै छौ! 
एगो खुंखार डाकू! 
अपन बंदूक फेक कान पकरि 
उठक बैठक कय गेलै
एगो दुराचारिक विषाक्त खून 
हम चूइस लेलियै या'
आव ओ महात्मा बनल अछि 
कतेक कहू 
केयो अपन पापक गठरी अपने फेक जाइया 
नहिं त’ हम चुम्बक  सं खींच लैत छियै 
दुनिया कनि धोअल पखारल लगैया 
लोक आश्चर्यित अछि !
आ हम मोने मोने मुग्ध! 
कनिञों सही 
किछु त’ नीक कय रहल छी। 

प्रमोद कुमार उर्फ नेहरू लाल दास
 पांडिचेरी 13-07-2019

Comments