छुतहर (मैथिली बीहनि कथा)
छुतहर
मैथिली बीहनि कथा
मायानंद के माय' भोरे सं अपसियांत छथिन । काइल्हे चिट्ठी आयल रहै जे तारानंद अपन पत्नी आ तीन वर्षक बेटाक संग आवि रहल छै! लगभग आठ बजे पहुंचतै । तखने सं हिनकर पारा गर्म छैन्ह। जै क्यो किछु पुछलक कि बमैक पड़ै छथिन! आबह तों। गायक घर साफ करा देलखिन । कनि चाउर, दालि, अल्लू पाइन भरनी के कहि रखवा देलखिन! एकटा छुतहर घैला आ टिनही लोहिया धरवा देलखिन! पत्ते पर खा लेतै से कहि सात बजैत बजैत बिलैया लगा क' घर मे बन्न भ' गेलखिन।
मायानंद पत्नी आ बच्चाक संग पहुंचलाह।अति उत्साहित । रस्ते सं देखबैत ऐलखिन, ई हमर खेत, ई हमर आमक गाछी, ई बम्बइ, ई चारू मालदह, कहैत कहैत घर पहुचि गेलाह।
अंगनाक केबारी पीट' लगलाह। कोनों हलचल नहिं! हारि क' दलान दिश गेलाह। बाबू अपने सं बरका क' चाह पिवैत रहथिन। पुछला पर कहलखिन जे, “ तोहर व्यवस्था माय गायक घर मे करा देलखुन अछि। ओत्तहि रहि काल्हि भोरे वापस जाय कहलखुन अछि। किछु क्षण मायानंद ठाढ़ रहि चट्टे घूमि गेलाह।वैह छुतहर घैला मे हाथ लगा पानि पीवि वापस बस स्टैंड दिश जाइत रहैत आ सोचैत रहैथ,” आइ काल्हि त' धरल्ले से सब आन आन जाति मे विवाह करै छै। हम कैलहुं त' एहन कोन आफत आवि गेलै। सोचलहुं बच्चा के मुंह देख माय के मोन पसिज जेतै ! से नहिं। ओकर हृदय त' पाथर!
डॉ. प्रमोद कुमार
पांडिचेरी, 15-06-2020
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