डबल बिरियानी (मैथिलीलघु कथा)

                  

आई रविन्द्रन के गृह प्रवेश छियै। रविन्द्रन आ ओकर पत्नी, रमा दुनु गोटे केरल सरकार के पी.डब्लू. डी विभाग में क्लर्क छथि। दुटा छोट छोट बालक छथिन। साधारण रहन सहन मुदा बड्ड नीक लोक। पवन जीक घरक पाछुवे में हुनकर घर छैन्ह। चारि घरक समुह। चारू घरक पिछला केवार आमने-सामने। बिच मे इनार। पाइनक यैह श्रोत। जखन तखन भेंट भ' जाइत रहै। पवनजी के सेहो दू संतान। तहि पर सं परदेशी । ओ दुनु प्राणी हिन्दी बजथिन तहिं मित्रता भ' गेलैन्ह जे बाद मे प्रगाढ़ भ' गेलै।
ओ सब डिपार्टमेंट सं लोन लय अपन घर बनवा रहल छलाह। जतय पवन जी सब रहै छलाह ओहि सं दू तिन गली हंटि क' रविन्द्रन पांच सेंट जमीन किनलैथ, घर बनब' लय। एक दिन घर बननाइ प्रारंभ भेलैन्ह। रस्ता कनि घुमान रहै मुदा लगिचे। एक आध वेर जा क' बनैत घर देख आयल रहथि पवन जी । प्रारंभहि में। अहि बिच पवन जी घर बदलि लेलनि जे कनि दूर मे रहै। 
पवन जी काल्हिये गिफ्ट मे देवा लय टी-सेट किन लेने रहथि। भोरे नहा सोना हाथ मे गिफ्टक पैकेट लेने बाले बच्चे विदा भेलाह। पहुंचलाह त' देखै छथि जे अनेको आदमी सड़क पर ठाढ़ छथि,क्यो क्यो जान पहचानक बांकी अंजान। हिनका सब के अबैत देखि हुलसि क' स्वागत कैलकन्हि आ घर मे ल' गेलैन्ह! आलीशान घर। संगमर्मर के फर्श आ ओहने आन सब फिटिंग! तहि पर सं दू मंजिला। परिवारक सदस्य सब अति अह्लादित भय पवन जी सब के घर देखब' लगलन्हि। रविनन्द्रन आ कि हुनकर कनिञां कतहु नहिं नजरि अवथिन। पुछला पर सब कहै हं हं बाहर मे छथि, त' ओत्त छथि। भाषाक समस्या सेहो मुसीबत। अधे छिधा बुझि पबथिन। गिफ्टक झोड़ा देबय चाहथिन मुदा सब किछु ने किछु कहि टारि दैन्ह। आव सब गोटे हिनका सब के निचलका हाल मे अनलकन्हि आ भोजन परोसि देलकैन। चिकेन बिरियानी ! अद्भुद सुगंध रहै। स्वाद आह! तहि पर सं विशेष आग्रह सं खुवेनाइ।  भुखल त' रहवे करथि, खूब खाइ गेलाह। पवन जी के किछु आन सन लगैन। रविन्द्रन कियैक ने देखाइत छथि! हुनकर कनिञां बच्चा क्यो नहिं । पवन जी आ हुनकर कनिञां आव कनि कनि तमसाइयो लगलखिन।  अपमान जेकां बुझाइन। रविन्द्रन सब त' बड्ड नीक लोक तखन एहन तिरस्कार कियै? समय समय पर आर्थिक मदद सेहो कैलियै तैयो देखियौ केहन निकलल! ठिके कहलकैया, “ खालक तर मे आदमी भेरिया” भोजन समाप्त भेलै। प्रणाम पाती क' जखन सब विदा भेला त' एक वेर फेर गिफ्टक पैकेट देबय लगलखिन त' बगले मे ठाढ़ सुरेन्द्रन, बढ़ई, जिनका सं पवन जी पलंग बनबौने रहथिन आगू आवि कहलकनि, “ सर इ हमर घर छी। रविन्द्रनक घर ओम्हर बला छियैन्ह। अहां बिनु बजौने अयलहुं ईश्वरक कृपा भेलैन्ह” हमरा लोकनि बड्ड खुश छी,” एतेक कहि रविन्द्रनक घर तक जे मुश्किल सं पन्द्रह बीस मीटर दूर रहै, पहुंचा देलकैन। । फेर जे हंसिक फुहारा छुट' लगलै से की कहल जाय।फेर सं ओहने नीक बिरियानी के दौड़ चललै आ पवन जी लोकनि डबल बिरियानी खा'  घर आपस ऐलाह।

डॉ प्रमोद कुमार
पांडिचेरी,8-7-20

Comments

  1. खुब निक लिखल अपने। डबल बिरयानी महो महो।

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