बकरी के बच्चा) मैथिली कविता

बकरी के बच्चा 
        (नेन्ना भुटका सभक लेल) 

ले  गई   बकरी   घास   खो 
नहि  खेबैं    त’  पाते    खो
देखही   मिठगर    पत्ता  छै
कनियों  नईं   ई   खट्टा   छै। 

         छोटका  छोटका  बच्चा छौ
         कारी   उज्जर    भूरा    छौ
         दौड़ै   छौ    आ    कूदै   छौ 
         मैं’   मैं   क’   क’  बजै   छौ। 

खा  लेलैं   त’  पाइन    पी
दौड़ले जो  तों   घर   दिश 
मैं’  मैं' क’  बच्चा कनै छौ
जाक’ ओकरा  दूध  पियो। 

          काल्हि तूं अविहै बच्चा संग 
          कूदब  फानब   खेलब   संग 
          दूध भात हम अनवै  काल्हि
          तू  चिंता  नहिं   करिहै  दाई! 

प्रमोद कुमार उर्फ नेहरू लाल दास 
पांडिचेरी 08-08-2019

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