भगवान के बनौतै (मैथिली कविता)
भगवान के बनौतै
आव कतेक कटबै, दुखाइयै
रुक न !
आव कतेक छंटबै, छनछनाइयै
रुक न !
हे यौ कल जोरै छी
आव नहिं घंसू, बिसबिसाइया'
धिरज धर न !
कि छलैं हैं, मोन पार !
पथ पर पड़ल पाथर!
सबके ठेस लगबै छलही
कतेक बात कथा सुनलैं!
क्यो निक नहिं कहलकहु !
गारि सुनि थेथर छलैं
आव देखही!!
की स की भ' गेलैं
भगवान बना देलियौ
छैनी मारि मारि
आव त' तों
मंदिर मे स्थापित होयबें
खूब भोग लगतहु
चढौआ चढ़तौ
कहियो हमरा दिश तकबैं !
कतेको के भगवान बनौलहुं
हम ओहिना के ओहिना !
हं से त' ठिके
अहिना रहू
नहिं त' भगवान के बनौतै!!
डॉ. प्रमोद कुमार
पांडिचेरी,20-12-2019
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