दया की खेती (हिन्दी कविता)
दया की खेती
हो जमीन धर्म की भाई और करें सभी दया की खेती
करुणा से सिंचाई करें सब और लगायें प्रेम की क्यारी
लहलहाएं मानवता के पौधे और भाईचारे की हवा बहे
सत्य का साम्राज्य हो फैला और जनक सा राजा बने
नैतिकता का खाद डले और जल सा साफ हृदय हो
वचन सत्य बोलें सब मानव और हो मिश्री सी बोली
बालक सभी कृष्ण से प्यारे युवा राम सा आज्ञाकारी
माता ममतामयी यशोदा जैसी बहु सीता सी धीरज वाली
मित्रता हो कृष्ण सुदामा जैसी लक्ष्मण भरत सी भैयारी
पतिव्रता नारी हों जग में राम सा एक पत्नी ब्रत धारी
प्रमोद कुमार उर्फ नेहरू लाल दास
पांडिचेरी 16-09-2019
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