कखन धरि सांस (मैथिली कविता)

कखन धरि सांस 

एक मिसिया के चिड़िया 
एतनी टा के चोंच 
उरि उरि लवै छै 
घास आ फूस 
दू पातक बिच मे 
फंसा देलकै खढ़ 
कनियें टा सभ काठी 
देलकै खोंसि
बनि गेलइ घर !
छोटकी छोटकी दूगो अंडा 
जेना छोटकी कांचक गोली 
चिड़ी जाइछै बैस 
चिड़ा लवै छै दाना 
टुकुर टुकुर तकै छै
आंखि सं आंखि मिलै छै 
चोंच में  चोंच सटै छै 
मुस्की छुटै छै 
पांइख फरफराइ छै 
जेना नृत्य ओ करै छै 
दू गो गोली मे 
दूटा जीवन पलै छै 
हरियर पत्ताक बिच मे 
सौंसे दुनियां ओकरा 
हरियरे लगै छै 
एगो चील 
सबटा देखै छै 
चिड़ा चिड़ी त’ 
आनंदे मगन छै 
आगू की हेतै 
कहां किछ सोचै छै!

प्रमोद कुमार उर्फ नेहरू लाल दास 
पांडिचेरी 21-08-2019

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