क्षणिकाएं (मैथिली कविता)

क्षणिकाएँ

        लक्ष्य हीन -1

कतय जाइत छी
अहां के  मतलव 
चलैत छी !
खा क’ अपसियांत छलहुं 
पचवै छी! 

हंसी -2

हंसै छी यौ……?
अजगुत…..!
की करू 
जीवन भरि कनिते रहलहुं
आव ज्ञान भेल 
तैं हंसै छी। 

फूहड़ -3

बत्तीसी कियै देखवै छी
दुसनी काकी 
खैस पड़लखिन 
हंसी लाइग गेल। 

      
    साहेबी -4                                                

की……..?
आइ बड्ड झारि रहल छी? 
दरमाहा भेट’ लै’ की? 
नहिं नहिं 
उपरका कमाइ भेलै’! 

प्रमोद कुमार उर्फ नेहरू लाल दास
 पांडिचेरी 29-07-2019

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