स्वागत हे नव वर्ष (मैथिली कविता)

स्वागत हे नव वर्ष!

कोयलिक कूक  गूंजै  ओहिना
शहर, गाम   ओ'  घर   अंगना
गाय    बहाबथि  धार  दूध  के
माखन लेपथि वालक ओहिना।

          मित्र बनथि सभ, शत्रु ने कोई
          फरै  आम,  महुआ  खुब चूबै
          खिलै फूल सभ रंग बिरंग के
          हाथ   मगर  ने   लगबै  कोई।

हे!  अठारह  जा  रहल छी !
याद त' बहुत  आयब  अहां
मित्र बनौलहुं बहुतों अहिवेर
जीत लेलहुं जेना तीन जहां।

          नैं कोनों दु: ख, आ ने बाधा
          आवै  ककरो  आगां- पाछा
          हे! उन्नीस आऊ प्रसन्नचित
          प्रेम- प्यार बहाउ एकछाहा।

सुख शांति  रहै, सद्बुद्धि  बढ़ै
सभ केओ सुख सं फूलै- फलै
किलकारी   गूंजै   आंगन   में
चहुं ओर अनुपम ज्योति जलै।

प्रमोद कुमार उर्फ, " नेहरू लाल दास"
पांडिचेरी
31-12-2018
भिनसर-7-25बजे।

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