कोन गाम कोन ठाम (मैथिली कविता)
कौन गाम कौन ठाम
कच्ची पक्की सड़क
धूरा गर्दा सं आच्छादित
पता नहिं की फुड़ैल
पड़ोसक गाम मे घुसि गेलहुं
क्यो नहिं तकलक
गोटैके बूढ़ पुरान
ओहो नहिं देलनि ध्यान
बढ़ल जाइछी
एतय त’ एकटा पोखरि रहै !
ओकर बगले मे ब्रह्मक स्थान !
माय’ डेंग पकड़ि क’ अनने रहै
कतेको बेर
दशको बितलै
मुदा स्मृति शेष अछि
गाम सं निकलितहि
प्रश्नक झड़ी लागि जाई
बौवा !की नाम, कौन गाम, कौन ठाम
ओकर पश्चात पांच पिढ़िक परिचय !
खट खट सुना दैथि
मोन त’ खौंझाय
मुदा माय’ चुप करा दियै’
आई की भेलै!
ब्रह्मक स्थान कतय छै!
रस्ता त’ वैह!
कनि काल ठक वक जकां
ठाढ़ रहलहुं
हे! ब्रह्म बाबा क्षमा करब !
माय गेल!
कि अहूं चलि गेलहुं!
अहि पापी के यैह लिखल छल!
पश्चाताप सं मोन खिन्न छल
तखने एगो बृद्ध अभरलाह
की नाम! कोन गाम! कोन ठाम!
जी जुरा गेल!
जेना साक्षात ब्रह्मे बाबा रहल होथि
हमरा ब्रह्म स्थान देखा क’ कहलथि
आव कहां क्यो अवै छै एम्हर
आत्मा तृप्त भेल!
ब्रह्म स्थान दिश बढ़लहुं
पाछू तकलहुं त’ क्यो नहिं
ओ बुढ़ा कहां गेलाह!
प्रमोद कुमार उर्फ नेहरू लाल दास
पांडिचेरी 01-06-2019
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