बड़का भैया (मैथिली कविता)
बड़का भैया
गाम भरि के बड़का भैया छथि
सभक दु:ख सुख में
सभ सं आगां!
आइ हुनकर सुखक सीमा नहिं
भिनसरे सं अपसियांत
बड़का पाबनि छै
सभ आबि रहल छनि
तीनू भाई, कनिञां, बच्चा सभ!
केओ देश सं
त' केओ विदेश सं
कैयेक वर्ष भ' गलै
सभ के भेंट भेना
दु- चारि टा बच्चा सभ के त
देखबो नहिं केने छथिन
एकटा भातिज, बड़का हाकिम
सबके कहने फिरै छथिन!
अपने यैह साइठ- पैंसठक
मुदा हाड़- पांजर बैसल,डांढ़ झुकल
दांतों गोटैके शेष
भाई-बहिन में सभ सं जेठ
पढ़ै में बड़ तेज
मास्टर सभ कहथिन्ह
ई आइ .ए. एस .बनवे करत!
भावी!!
पिताक स्वर्गवास
ई राता- राती जुआन भ' गेलाह!
ब्लाक में कर्मचारी
घर चल' लगलै
भाय सभ के पढ़ा-लिखा
बड़का- बड़का आदमी बनौलथि
अपने ब्रह्मचारी
एगो बहिन निर्मला
प्यार सं 'निरू' कहथिन्ह
निक घर - वर कैलखिन्ह
आबि जाइन
छ: मास, बरख दिन पर सासुर सं
ओकरा वापिस जाय काल
बड्ड कनैथ, बड़का भैया!
ओहो पौरकां.....!!!
आई पावनिक तेसर दिन
वापसिक तैयारी
धिया- पुता जोर मारलकै
फैमिली फोटो- फैमिली फोटो
वेश! पहिले चारू भाय
तिन टंगा कुर्सी
ओही पर बैसलाह, बड़का भैया
फरमान भेलै...
स्माईल प्लीज!
सभक मुंह पर नकली मुस्कान!
केकरो खैवाक दु:ख त' केकरो सुतवाक
फेर फरमान भेलै
ऊंह! बड़का चचा के त'
धोती फाटल छनि!
झांपू-झांपू,
फोटो खराब भ' जैत!
सभ भाय एके राग अलापलथि
हां! आव फोटो खींचु
बड़का भैयाक कुर्सिक एक टांग
आर टुटि गेलन्हि!!
प्रमोद कुमार, उर्फ " नेहरू लाल दास"
पांडिचेरी
दि.08-01-2019
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