माधव और मोती (हिन्दी कविता)
माधव और मोती
जैसे माधव ने टूटे दिल को
चुन चुन कर फिर जोड़ा था
फैले बिखरे थे कर्ण के मोती
आज कर्ण प्रिय ने जोड़ा है।
कहीं किसी कोने में दीपक
जलकर प्रकाश फैलाता था
न कोई जाने न कोई पूछे
एक पहचान को मरता था।
धन्य भाग्य जो कर्ण प्रिय ने
कर्ण कुल में जन्म लिया है
पूत के पांव पालने में दिखते
इसने ऐसा सिद्ध किया है।
जुग जुग जियो फूलो फलो
सुगंध पसारो और साथ चलो
हंस वाहिनी का आशीष लेकर
हंस समान ही मोती चुगो।
प्रमोद कुमार
पांडिचेरी,13-12-2019
Comments
Post a Comment