बताह सं बियाह कैलें तों (महाशिवरात्रि पर विशेष) मैथिली कविता
)
बहिना केहेन बताह सं ब्याह करैं तों
कोना मति मारल गेलौ फैंस गेलै तों
पिछैर गेलैं तों गे बहिना अन्हेर कैलैं तों !
चैन पर चान चमकै गरा मे सांप गई
ओझरल जटा सं पानिक धार बहै
हहैर जेबैं तों गे बहिना नाश कैलैं तों !
बैसल बरद पर बतहा छाउर लेपने छै
भूत प्रेत आगां पाछां घुमि घुमि नचै छै
सम्हरि जो तों गे बहिना खसि पड़लैं तों !
लोटे लोटे भांग पिबै डमरू टना टन गई
कपड़ा लत्ता गोल छै बघछाला लपटने
ई कोन तप कैलैं लाजे मरि जेबैं तों !
मोने मोने हंसै गौरी हमर बहिना अनाड़ी
त्रिभुवनक मालिक छथिन बनल भिखारी
के एहन त्यागी सखी नहिं बुझबैं तूं !
डॉ. प्रमोद कुमार
पांडिचेरी,21-02-20
Comments
Post a Comment