देवाल (मैथिली बीहनि कथा)
देवाल
(बीहनि कथा)
हे यौ ! बाउ! बाउ....! नहिं सुनै छी! अहीं के कहै छी!
माय गई! केदन बजै छै! मुदा एत्त त हमहीं टा छी। आर कहां क्यो छै!
बाऊ…….!यौ बाऊ....! एमहर देखियौ ने!
कोम्हर? एम्हर त’ आधा छिधा ढ़हल ढ़नमनैल देवाल छै! और कहां कोइ!
हँ यौ बाऊ! हमहीं बजै छी। आधा ढ़हल -ढ़नमनैल देवाल।
अहांक नाम आशु.... याने आशुतोष छी ने!
हं यौ! मुदा अहां कोना जनै छियै? अहां त’ देवाल.....
बच्चा हम सब जनै छियै। माय अहां के कहलैथ जे जा क’ अपन घरारी देख अबिहै। ठीक ने।
हं यौ। अहां त’ सभटा जनै छियै। चचा के घर मे ठहरल छी ने! “हँ”!!
बौवा मोबाइल अछि अहां के? हँ यौ! एकदम मोडर्न। देखियौ।
त सुनू! नह सं हमर देह सं चून नहू नहू एक एक परत खोखरू। हं अहिना। “की देखै छियै? “लालछड़ी बला के बच्चा सभ घेरने छै। “आशु बजलाह। के बनौलक ई चित्र?”
अहिंक पप्पा !ऐं वो चित्रो बनवै छलखिन। “हं बाऊ! बड़ नीक। बड्ड कोमल हुनकर हृदय! “वाप रे! हमसब त’ बुझै छियै जे ओ बड्ड कठोर......!
फेर दोसर परत खोखरू! हँ! खोखरै छी। “आब की देखलियै “?
एगो पालकी सं कनिञां के निकलैत चित्र। कात मे ढोल पिपही बजनियां सब। के बनौलक ई चित्र?
अहांक बाबा। वैह हमरो बनौलथि। अहां दादी के लवै के उपलक्ष मे।
बाऊ! अहिना अहां ठाढ़ रहू। हम अहां के अहांक खानदानक गौरवक कथा कहब। सुनि लिय’!
हम त’ आब -तब मे छी। अहां जत्ते फोटो खींच’ चाही खींच लिय'
अगला वेर त’ कोदाइरे ल’ क’ आब’ पड़त!
प्रमोद कुमार उर्फ नेहरू लाल दास 9-9-2019
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