यह सुगंध कहां से आता है (हिन्दी कविता)

यह सुगंध कहाँ से आता है

पग पग पर हैं कीच पड़े
ओछे-खोटे लोग भड़े
सूखें पेड़ हर मौसम में
हरियाली कौन खिलाता है
                   यह सुगंध कहां ......।
भावहीन इस उपवन में 
पाषाण हृदय ही चलता है
अन्धकार भरे जीवन पथ पर
दीप लिये कौन चलता है।
                    यह सुगंध कहां.....।
चीख-पुकार, शोषण-रुदन
हर पल मूल्यों का चीर हरण
कोलाहल भरे इस जीवन में
किलकारी कौन गुँजाता है
                     यह सुगंध कहां.....।
ऋतुओं का कोई भेद नहीं
देश काल का लेख नहीं
धू-धू कर जलते मानवता पर
शीतल जल कौन बरसाता है
                       यह सुगंध कहाँ ......।

@ प्रमोद. 10-2-2018

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