वौवा की भेलौ रौ (मैथिली गीत)

वौवा की भेलौ रौ 
                                     (मेथिली गीत) 

पांच बिघाक  खेती घर  घरारी  साग पात सं  भरल  बाड़ी 
माछ रन्हाइ छलअंगना मेआ दूरा पर दादा कतरैथ सुपाड़ी 
कहुना क' बी. ए कैलियै यौ ,सपना देखि  परदेश पड़ेलियै 
वक वक मुंह आव तकै छी 
                          वौवा की भेलौ रौ,  बाबू नहिं पुछु यौ। 

कोठा  हेतै   सोफा   हेतै   आगू    पाछू    मोटर   चलतै 
गहना साड़ी जैकेट  सुइटर क्लव सिनेमा नाटक थियेटर 
सलाम बजौतै दिन राति नौकर  होटल मे डिनर  हेतै यौ 
आव त ‘हम हाकिम कहेवै 
                       वौवा की भेलौ रौ, बाबू नहिं पुछू यौ। 

तरवा घिसा क’ प्राइवेट नौकरी भोरे जाक’ राति  क लौटी 
खून सुखा गेल घामे नहाइ छी तै पर सं हंटनी ओ डंटनी 
छोट छिन खोंता ठेलम ठेला दरमहो त’ छै बस एतनी यौ 
मालिक छलौं आव कुकुर यौ 
                          वौवा की भेलौ रौ,  बाबू नहिं पुछु यौ। 

प्रमोद कुमार पांडिचेरी 
14-11-2019

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