केहेन लगलै लगन (मैथिली कविता)

केहेन लगलै लगन 

केहन लगलै लगन 
जेकरा खाइलै ने अन्न 
सौंसे बेमाय फाटल 
दुनू आंइखो धंसल 
पेट पंजरी बैसल 
गाल धंसल धंसल 
जखन लगलै लगन 
मोन भेलै मगन 
ने दिने बुझै 
आ ने राइते बुझै 
बुढ़िया माय के कहै 
तू धीरज धरै 
हम कमा क’ अनवै 
गेलै दिनों बिसरि 
ने रहलै समय के खबरि 
ऊ छौंड़ा एहन 
दिन मे ठेला चलवै 
राइत क’  पढाइ करै 
एक दिन ऐलै एहन 
बौवा हाकिम भेलै 
माय ठेला बैसलै 
बेटा ठेल’ लगलै 
माय के नोर खसै 
बेटा मगन रहै 
अहि कलयुग मे कोना एहन 
श्रवण भेलै !

प्रमोद कुमार उर्फ नेहरू लाल दास 
पांडिचेरी 27-09-2019

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