कन्हा परहक गमछा (मैथिली कविता)

कन्हा परहक गमछा

कन्हा परहक गमछा
आइ रुसि गेल
नहिं पोछबौ तोहर मूंह
हाथ कि पैर
आदति कियै खराब कैलें
हमर मोन बदलि गेल!
ल' आ ओहि नेना के
फेर सं
फेर सं ओकर मुंह पोछब
बात्सल्य हमरो मे अछि
ओकरा कोरा मे लेने
तोरा जे सुख भेटौ
वैह हमरा ओकर अंग पोछ' में
आनि ले फेर सं ओकरा
ओकर मुंह पोछब
मूल मे
आ तोरो पोछि देबौ
ब्याज मे
दिल्ली दूर नहिं छै!

डॉ प्रमोद कुमार
पांडिचेरी,26-7-2020

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